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नगर पालिका या मधुशाला? पार्षदों ने विकास के मंदिर को बनाया 'दारू का अड्डा' और 'मारपीट का अखाड़ा'! 🍻🥊

# 03 Mar, 2026

तखतपुर।{परमेश्वर ठाकुर} जहाँ विकास की फाइलें दबनी चाहिए, वहाँ शराब की बोतलें खुल रही हैं! तखतपुर नगर पालिका कार्यालय में होली की खुमारी इस कदर चढ़ी कि मर्यादा और कानून दोनों को 'होलिका' में झोंक दिया गया। नगर पालिका अधिकारी की सरपरस्ती में आयोजित इस "मुर्गा-दारू पार्टी" ने न केवल सरकारी दफ्तर को कलंकित किया, बल्कि विरोध करने वाले एक निर्दोष पड़ोसी को लहूलुहान भी कर दिया।

🥊 🛑 सीसीटीवी "अंधा", पार्षद "मस्त"

हैरानी की बात यह है कि जिस दफ्तर में चप्पे-चप्पे पर तीसरी आँख (CCTV) का पहरा रहता है, पार्टी शुरू होते ही वह "अंधी" हो गई। 📉 साज़िश के तहत कैमरों को बंद कर दिया गया ताकि पार्षदों और अधिकारियों की इस 'नशेबाजी' का कोई सबूत न रहे। जब फुटेज माँगी गई, तो रटा-रटाया जवाब मिला— "रात में कैमरा बंद था।"

👊 पड़ोसी को पीटा, शिक्षक को धमकाया मर्यादा की सारी हदें तब पार हो गईं जब शोर से परेशान एक पड़ोसी ने विरोध किया। नशे में धुत माननीय पार्षदों ने उसे दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। हद तो तब हो गई जब वीडियो बना रहे एक शिक्षक के घर में घुसकर पार्षदों ने मोबाइल छीना और सबूत डिलीट कर दिए। 📱 अधिकारी तमाशबीन बने रहे, मानो मौन सहमति दे रहे हों।

🤫 डर का साया: नौकरी या इंसाफ? पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटकने के बजाय खामोश रहने पर मजबूर है। वजह? उसकी पत्नी की आंगनबाड़ी की नौकरी। 👩‍🏫 दबंग पार्षदों ने साफ धमकी दी है कि अगर रिपोर्ट लिखाई, तो पत्नी को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

बड़ा सवाल: क्या जनता ने इन प्रतिनिधियों को नगर के विकास के लिए चुना था या सरकारी दफ्तर में बैठकर जाम छलकाने और गुंडागर्दी करने के लिए? ❓

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